Saturday, August 4, 2018

Reservation Policy Changed??? Click here to read

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Government might change Reservation policy to Economic based. Read this blog to find out all aspects of reservation and why reservation policy may change.

There has always been controversies related to Reservation Policy. Many Caste and minority groups often try to either include themselves in benefited category or to enlarge the reservation benefits.

Intially Reservation was only imposed for 10 years for trial period. The only motive behind this was to uplift the weaker sections of the society. At that time most weaker sections were belonging to backward castes or some minority groups. So at that time it was imposed on the basis of caste system.

But still after 10 years it continued for various reasons among which political greed was the main reason.

There has always been a demand of Changing the Policy from Caste based to Economic based, ever since its beginning but this demand has strengthened from last decade.

Main problem with the Reservation policy being caste based is that, it only benefits those people who already have got benefited.

There are many persons in upper castes who doesn't even manages to get two times meal. Isn't it unfair for them.

Also there are many Persons in Lower castes who doesn't even gets an inch of this benefit.

After seeing data and records, you'll find that most of the persons who are now getting job or getting admissions with the help of reservation have already got ancestors getting job on the Reservation basis. It still serves injustice to those who desperately needs it.

Reservation policy on the basis of Caste also hampers Secular belief of the country.

You will always find people fighting for Reservation.

Now a days Maratha Protest is such an example.

In last one-Year or so many party leaders like Ramwilash Pashwan, Mamta Benarjee, Tejaswi Yadav e.t.c are now demanding reservation for weaker section of upper castes too.

Nitin Gadkari, The Ministry of Road Transport and Highway of India, has made an official statement indicating that Government might change Reservation Policy to Economic based.

He said that Government is planning to make Reservation Economic based. He said this when he was asked about Maratha Protest.

There is no statement made by other parties till now.

I guess this is a good move which Government is planning to take as long as needy gets benefit and greedy gets nothing.


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सरकार आरक्षण नीति को आर्थिक आधार पर बदल सकती है। आरक्षण के सभी पहलुओं को जानने के लिए इस ब्लॉग को पढ़ें और आरक्षण नीति क्यों बदल सकती है ये भी जान ने के लिए पढ़ें।


आरक्षण नीति से संबंधित विवाद हमेशा रहे हैं। कई जाति और अल्पसंख्यक समूह अक्सर लाभकारी श्रेणी में या आरक्षण लाभों को बढ़ाने के लिए स्वयं को शामिल करने का प्रयास करते हैं।

शुरुवाती दौर में रूप से आरक्षण केवल परीक्षण अवधि के लिए 10 वर्षों के लिए लगाया गया था। इसके पीछे एकमात्र उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को ऊपर उठाना था। उस समय सबसे कमजोर वर्ग पिछड़े जातियों या कुछ अल्पसंख्यक समूहों से संबंधित थे। तो उस समय यह जाति व्यवस्था के आधार पर लागू किआ गया था।

लेकिन अभी भी 10 वर्षों के बाद यह विभिन्न कारणों से जारी रहा, जिनमें से राजनीतिक लालच मुख्य कारण था।

जाति से आरक्षण पॉलिसी को आर्थिक आधार पर आधारित बनाने की मांग हमेशा रही है, लेकिन यह मांग पिछले दशक से मजबूत हुई है।

जाति आधारित आरक्षण नीति के साथ मुख्य समस्या यह है कि, यह केवल उन लोगों को लाभान्वित करता है जो पहले ही लाभान्वित हो चुके है।

ऊपरी जातियों में बहुत से लोग हैं जो दो बार भोजन पाने का प्रबंध भी नहीं कर सकते है। क्या उनके लिए यह अनुचित नहीं है।

इसके अलावा निचली जातियों में कई लोग हैं जिन्हें इस लाभ का एक इंच भी नहीं मिलता है।

डेटा और रिकॉर्ड्स देखने के बाद, आप पाएंगे कि ज्यादातर लोग जो नौकरी प्राप्त कर रहे हैं या आरक्षण की सहायता से प्रवेश प्राप्त कर चुके हैं, पहले से ही उनके पूर्वजों को आरक्षण आधार पर नौकरी मिल चुकी है। यह उन लोगों के साथ अन्याय करता है जिनके लिए ये बेहद जरूरी हैं।

जाति के आधार पर आरक्षण नीति देश की धर्मनिरपेक्ष धारणा को भी प्रभावित करती है।

आप हमेशा आरक्षण के लिए लड़ रहे लोगों को पाएंगे।

मराठा विरोध इसी तरह का एक उदाहरण है।

पिछले एक साल में रामविलाश पश्वान, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव जैसे कई पार्टी नेता अब ऊंची जातियों के कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं।

भारत के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री, नितिन गडकरी ने एक आधिकारिक बयान दिया है जो दर्शाता है कि सरकार आरक्षण नीति को आर्थिक आधार पर बदल सकती है।

उन्होंने कहा कि सरकार आरक्षण आर्थिक आधार बनाने की योजना बना रही है। उन्होंने यह मराठा विद्रोह के बारे में पूछे जाने पर कहा।

अब तक अन्य पार्टियों द्वारा कोई बयान नहीं दिया गया है।

मुझे लगता है कि यह एक अच्छा कदम है जब तक जरूरतमंदों को लाभ मिले।


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